सोनम बाजवा: सफलता की ऊँचाइयों पर पहुँचकर भी ‘असली सफलता’ की तलाश में

सोनम बाजवा: सफलता की ऊँचाइयों पर पहुँचकर भी ‘असली सफलता’ की तलाश में

 

फिल्म इंडस्ट्री में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो सिर्फ अपनी खूबसूरती या ग्लैमर से नहीं, बल्कि अपने काम के प्रति समर्पण और सादगी से लोगों के दिलों में जगह बना लेते हैं। पंजाबी सिनेमा की चमकती हुई सितारा सोनम बाजवा उन्हीं में से एक हैं। आज वह पंजाबी और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे लोकप्रिय और सफल अभिनेत्रियों में शुमार हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि खुद सोनम अभी भी खुद को “सफल” नहीं मानतीं।

सोनम बाजवा: image credit instagram profile
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सोनम का मानना है कि सफलता का मतलब केवल नाम या शोहरत नहीं, बल्कि भीतर का संतोष है—वह संतुष्टि जो इंसान को अपने काम से मिलती है। वह कहती हैं, *“लोकप्रियता या प्रशंसा असली सफलता का पैमाना नहीं है। असली सफलता तब होती है जब मैं अपने काम से खुश और संतुष्ट महसूस करती हूं।”*

 

मेहनत और आत्ममंथन से गढ़ी पहचान

सोनम बाजवा: image credit instagram profile
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सोनम बाजवा का फिल्मी सफर आसान नहीं रहा। मॉडलिंग से शुरुआत करते हुए उन्होंने कई संघर्षों और असफलताओं का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज जब वह पंजाबी सिनेमा की सबसे पसंदीदा अभिनेत्रियों में से एक हैं, तब भी वह खुद को लगातार बेहतर बनाने की कोशिश में लगी रहती हैं।

 

वह बताती हैं कि हर दिन उनके लिए एक नया अवसर है – सीखने का, सुधारने का और आगे बढ़ने का। *“मुझे लगता है कि अभी मुझे बहुत मेहनत करनी है। मैंने कई फिल्में की हैं, लेकिन हर नई फिल्म के साथ उतनी ही नर्वसनेस और उत्साह महसूस करती हूं। ये दोनों भावनाएं मुझे अपने काम को और बेहतर करने की प्रेरणा देती हैं,”* सोनम ने मुस्कुराते हुए कहा।

 

हर फिल्म, एक नई चुनौती

 

सोनम के लिए हर किरदार एक नई चुनौती होता है। वह कभी किसी रोल को हल्के में नहीं लेतीं, चाहे वह बड़े पर्दे की फिल्म हो या कोई छोटा प्रोजेक्ट। उनके अनुसार, असली कलाकार वही है जो हर किरदार को पूरी ईमानदारी और जुनून से निभाए।

 

वह कहती हैं, *“मैं हमेशा सोचती हूं कि कैसे अपने काम को और अच्छा बना सकती हूं, कैसे किसी फिल्म को और सफल बना सकती हूं। मेरे लिए सफलता सिर्फ प्रसिद्धि पाने या तालियां सुनने का नाम नहीं है। असली संतोष तब मिलता है जब मैं अपने काम से पूरी तरह खुश होती हूं।”*

 

यह सोच सोनम को दूसरों से अलग बनाती है। जब कई कलाकार शोहरत की दौड़ में खुद को खो देते हैं, वहीं सोनम अपनी जड़ों से जुड़ी रहती हैं और आत्ममंथन को अपनी सफलता का आधार मानती हैं।

 

आत्मविश्वास के साथ विनम्रता

 

सोनम का कहना है कि वह इस बात पर ध्यान नहीं देतीं कि लोग उन्हें कैसे देखते हैं, बल्कि इस बात पर ध्यान देती हैं कि वह खुद अपने काम से कितनी संतुष्ट हैं। *“मुझे नहीं पता कि लोग मुझे कैसे देखते हैं, लेकिन मैं अपने काम में आत्मविश्वासी हूं। फिर भी हमेशा लगता है कि मैं और बेहतर कर सकती थी। शायद यही सोच मुझे आगे बढ़ाती है।”*

 

यह विनम्रता और आत्मविश्लेषण ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। यही कारण है कि सोनम हर फिल्म के साथ अपने अभिनय में निखार लाती गई हैं।

ईश्वर में अटूट आस्था

 

अपनी मेहनत और लगन के साथ-साथ सोनम ईश्वर की कृपा को भी अपनी सफलता का कारण मानती हैं। वह कहती हैं, *“मैं हर चीज के लिए ईश्वर का धन्यवाद करती हूं। जो कुछ भी मिला है, वह मेरे लिए आशीर्वाद है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं ठहर जाऊं। मैं चाहती हूं कि हर प्रोजेक्ट में खुद को पिछले से बेहतर साबित करूं।”*

 

उनका यह दृष्टिकोण बताता है कि वह सिर्फ करियर बनाने में नहीं, बल्कि अपने भीतर के इंसान को भी संवेदनशील और आभारी बनाए रखने पर विश्वास करती हैं।

पंजाबी सिनेमा से हिंदी फिल्मों तक का सफर

 

सोनम ने अपने करियर की शुरुआत पंजाबी सिनेमा से की थी। *“Best of Luck”*, *“Punjab 1984”*, *“Nikka Zaildar”* और *“Carry on Jatta 2”* जैसी फिल्मों ने उन्हें दर्शकों के दिलों में खास जगह दिलाई। उनकी प्राकृतिक अदाकारी और स्क्रीन पर सादगी ने उन्हें हर उम्र के दर्शकों का पसंदीदा बना दिया।

 

इसके बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों और वेब प्रोजेक्ट्स में भी कदम रखा, जहाँ उनकी अभिनय क्षमता और परिपक्वता की खूब सराहना हुई। लेकिन लोकप्रियता बढ़ने के बावजूद, सोनम का स्वभाव पहले जैसा ही बना रहा—जमीन से जुड़ा और सच्चा।

 

“सफलता ठहराव नहीं, निरंतर यात्रा है”

 

सोनम के लिए सफलता का मतलब किसी ऊँचाई तक पहुँचकर ठहर जाना नहीं, बल्कि लगातार आगे बढ़ते रहना है। वह मानती हैं कि हर दिन एक नया अवसर है खुद को बेहतर साबित करने का। यही कारण है कि वह कभी अपने काम से संतुष्ट होकर रुकती नहीं, बल्कि अगले लक्ष्य की ओर बढ़ती रहती हैं।

 

वह कहती हैं, *“हर इंसान का सफर अलग होता है। मेरे लिए सफलता का अर्थ है – निरंतर सीखते रहना और हर दिन खुद का बेहतर संस्करण बनना।”*

 

निष्कर्ष

 

सोनम बाजवा का जीवन और सोच हम सबके लिए प्रेरणा है। उन्होंने यह साबित किया है कि असली सफलता नाम या प्रसिद्धि से नहीं, बल्कि मेहनत, आत्म-सुधार और विनम्रता से मिलती है। जब कोई कलाकार अपने काम को पूजा समझकर करे, तभी वह दर्शकों के दिलों में अमर हो जाता है।

 

आज सोनम बाजवा न सिर्फ एक सफल अभिनेत्री हैं, बल्कि एक ऐसी इंसान भी हैं जो अपने भीतर की शांति और संतोष को सबसे बड़ी सफलता मानती हैं। उनकी यह सोच न सिर्फ कलाकारों के लिए, बल्कि हर उस इंसान के लिए प्रेरणादायक है जो अपने जीवन में सच्ची “सफलता” की तलाश में है।

 

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