Asrani, image credit instagram profile

Veteran actor Govardhan Asrani passes away at 84 – ‘Sholay’ ke famous jailer ne chhodi ₹50 crore ki legacy aur anmol yaadein

Veteran actor Govardhan Asrani passes away at 84 – ‘Sholay’ ke famous jailer ne chhodi ₹50 crore ki legacy aur anmol yaadein

भारतीय सिनेमा ने 20 अक्टूबर 2025 को अपने सबसे प्यारे और बहुमुखी कलाकारों में से एक — Asrani — को खो दिया। 84 वर्ष की आयु में उनका निधन लंबी बीमारी के बाद हुआ। परिवार की ओर से जारी बयान में बताया गया कि अंतिम संस्कार मुंबई में बेहद सादगी से, परिवार और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में किया गया।

असरानी, जिन्हें दर्शक सबसे ज्यादा ‘शोले’ के मज़ेदार जेलर के रूप में याद करते हैं, ने अपने अभिनय से हिंदी सिनेमा में हंसी और संवेदना दोनों का खूबसूरत संगम पेश किया। पांच दशक से भी अधिक के करियर में उन्होंने 350 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी।


शोले से लेकर चालबाज़ तक – असरानी की अभिनय यात्रा

1960 के दशक के अंत में अपने करियर की शुरुआत करने वाले ने 1970 और 80 के दशक में हास्य भूमिकाओं के जरिए जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की। उनकी कॉमिक टाइमिंग, संवाद अदायगी और चेहरे के भाव उन्हें एक अलग ऊंचाई पर ले गए।

उनकी फिल्मों में “शोले,” “अभिमान,” “चुपके चुपके,” “आँखें,” “राजा बाबू,” “हेरा फेरी” और “दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे” जैसी सुपरहिट शामिल हैं। वे ऐसे कलाकार रहे जो किसी भी भूमिका में सहज दिखाई देते थे — चाहे वह पुलिस ऑफिसर हो, चतुर नौकर, या कोई मज़ेदार दोस्त।


सिर्फ अभिनेता नहीं, निर्देशक और लेखक भी थे असरानी

बहुत से लोग नहीं जानते कि Asrani ने सिर्फ एक्टिंग ही नहीं, बल्कि निर्देशन और लेखन में भी हाथ आजमाया था। उन्होंने “ओम शांति ओम”, “चाला मुसद्दी ऑफिस ऑफिस” जैसी फिल्मों में अहम भूमिकाएँ निभाईं और कुछ गुजराती फिल्मों के निर्देशन का भी जिम्मा संभाला। उनके निर्देशन में बनी फिल्में अपनी सादगी और कॉमेडी के लिए दर्शकों द्वारा पसंद की गईं।


40 से 50 करोड़ की नेट वर्थ छोड़ी पीछे

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक Asrani  की कुल संपत्ति लगभग ₹40 से ₹50 करोड़ के बीच आंकी गई है।
उनकी आय के स्रोत सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थे — असरानी ने टीवी शोज़, स्टेज परफॉर्मेंस, ब्रांड एंडोर्समेंट और निर्देशन से भी अच्छा खासा धन अर्जित किया।
मुंबई के जुहू और अंधेरी में उनके पास प्रॉपर्टी थी, और वे कई वर्षों से रॉयल्टी इनकम भी प्राप्त कर रहे थे।

असरानी अपनी सादगी के लिए जाने जाते थे। उन्हें अक्सर बिना किसी दिखावे के, सामान्य जीवन जीते हुए देखा गया। यही कारण था कि वे दर्शकों के साथ-साथ इंडस्ट्री के हर कलाकार के प्रिय रहे।


परिवार और निजी जीवन

असरानी की पत्नी मंझरी असरानी भी थिएटर और फिल्मों से जुड़ी रही हैं। दोनों ने कई मंचीय नाटकों में साथ काम किया था। उनका एक बेटा है जो फिल्म निर्माण से जुड़ा हुआ है।
परिवार के सूत्रों के अनुसार, असरानी अपने परिवार के बेहद करीब थे और उन्होंने हमेशा अपने बेटे को सिनेमा की असली कला सिखाने पर जोर दिया।


आखिरी प्रोजेक्ट्स और अधूरी ख्वाहिशें

निधन से कुछ समय पहले असरानी ने अपनी आखिरी फिल्म की शूटिंग पूरी की थी, जो आने वाले महीनों में रिलीज़ होने की उम्मीद है। बताया जाता है कि वे अब भी अभिनय को लेकर उतने ही उत्साही थे जितने अपने शुरुआती दिनों में थे।
उन्होंने एक बार इंटरव्यू में कहा था,

“मैं तब तक एक्टिंग करूंगा, जब तक दर्शक मेरी हंसी पर मुस्कुरा रहे हैं।”

Asrani, image credit instagram profile
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उनकी यह बात आज उनके चाहने वालों के दिलों में गूंज रही है।


बॉलीवुड में शोक की लहर

गोवर्धन असरानी के निधन के बाद बॉलीवुड जगत शोक में डूब गया। अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, जॉनी लीवर, परेश रावल और कई अन्य कलाकारों ने सोशल मीडिया पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
अमिताभ बच्चन ने लिखा,

“असरानी जी के बिना हिंदी सिनेमा की कॉमेडी अधूरी है। वे सिर्फ हंसी नहीं, दिल में अपनापन छोड़ जाते थे।”


हंसी की विरासत, जो हमेशा अमर रहेगी

असरानी का योगदान केवल अभिनय तक सीमित नहीं रहा; उन्होंने भारतीय सिनेमा में हास्य अभिनय को एक नई गरिमा दी। उन्होंने यह साबित किया कि कॉमेडी सिर्फ हंसी का माध्यम नहीं, बल्कि समाज का दर्पण भी है।
आज भी जब दर्शक “हम अंग्रेजों के ज़माने के जेलर हैं” का डायलॉग सुनते हैं, उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है — और यही असरानी की सबसे बड़ी जीत है।


निष्कर्ष

गोवर्धन असरानी का जाना भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी सादगी, ईमानदारी और कला के प्रति समर्पण से जो नाम कमाया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा रहेगा।
वे भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज़, उनका ह्यूमर और उनके किरदार सिनेमा के ज़रिए हमेशा ज़िंदा रहेंगे।

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